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वायरल हो रहा है सुपरहिट गीत – “मैं भारत का संविधान हूँ”

लेखक: दिनेश किशोर गुप्ता ‘आनंदश्री’

नई दिल्ली:
देशभर में इन दिनों एक सशक्त, भावनात्मक और विचारोत्तेजक गीत “मैं भारत का संविधान हूँ” सोशल मीडिया और साहित्यिक मंचों पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह गीत संविधान की आत्मा, उसके मूल्यों और लोकतांत्रिक चेतना को शब्दों में पिरोता है। इस प्रभावशाली रचना के रचयिता हैं प्रसिद्ध लेखक एवं विचारक दिनेश किशोर गुप्ता ‘आनंदश्री’, जो एल.एल.बी. फर्स्ट ईयर के छात्र भी हैं।

यह गीत केवल एक काव्यात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संविधान की जीवंत आवाज़ बनकर उभरता है। इसमें स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान, समानता, न्याय, अधिकार और कर्तव्य—इन सभी को अत्यंत सरल किंतु प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। गीत की पंक्तियाँ संविधान को स्वयं बोलते हुए दर्शाती हैं, जो जनता, संसद और न्यायपालिका के बीच सेतु का कार्य करता है।

गीत में दलित-वंचितों की आवाज़, कमजोर वर्गों का साहस और लोकतंत्र की कार्यशैली को जिस सशक्तता से उकेरा गया है, वह श्रोताओं और पाठकों के मन को गहराई से छू रहा है। यही कारण है कि यह रचना विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, साहित्यकारों और आम नागरिकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि “मैं भारत का संविधान हूँ” आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक रचना है, जो नागरिकों को उनके संवैधानिक मूल्यों की याद दिलाती है और लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। सोशल मीडिया पर इस गीत की पंक्तियाँ पोस्टर, रील्स और पाठ्य चर्चाओं का हिस्सा बन चुकी हैं।

दिनेश किशोर गुप्ता ‘आनंदश्री’ की यह रचना न केवल साहित्यिक उपलब्धि है, बल्कि एक राष्ट्रीय चेतना का स्वर भी है, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य की दिशा दिखाती है।

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